बुद्ध के आंसू-Budh ke Anshu

0
190

भगवान बुद्ध जंगल में आम के एक वृक्ष के नीचे बैठकर साधना कर रहे थे।

कुछ बच्चे आम खाने के लालच में पेड़ पर पत्थर फेंकने लगे। पत्थर लगते ही पेड़ पर से आम गिरे तथा बच्चों ने खुशी-खुशी उन्हें उठा लिया।

तभी एक बच्चे ने आम को निशाना बनाकर एक छोटा सा पत्थर फेंका लेकिन वह भगवान बुद्ध के सिर पर आकर लगा। उनके सिर से खून बहने लगा।

यह दृश्य देखकर आम तोड़ रहे सारे बच्चे बहुत डर गए। वे भगवान के पांव छूकर उनसे अपने अपराध की माफी मांगने लगे।

बुद्ध ने निश्चल बच्चों को सहमे हुए देखा तो, उनकी आंखें नम हो गई।

एक बच्चे ने हाथ जोड़कर कहा, ‘ सिर में चोट लगने के कारण आपकी आंखों से आंसू बह रहे हैं। यह हमारे द्वारा किए गए गलत काम का परिणाम है।’

बुद्ध ने उत्तर दिया, ‘ वत्स, चोट लगने के कारण मेरी आंखों से आंसू नहीं आए हैं।

मैंने देखा कि तुम लोगों ने पेड़ को पत्थर मारा तो उसने तुम्हें मीठे आम दिए, लेकिन जब पत्थर मुझे लगा, तो तुम्हें डर के मारे थर-थर का अपना पड़ा।

तुम्हें डरा हुआ देखकर मेरी आंखों में आंसू आए हैं। ये आंसू इसलिए भी है कि तुमने पत्थरों से इस पेड़ को चोट पहुंचाई।

क्या पेड़ को बिना चोट पहुंचाए तुम आम नहीं तोड़ सकते?’

भगवान बुद्ध की करुणा भावना देखकर बच्चे हैरान रह गए। उन्होंने फिर कभी पेड़ को चोट ना पहुंचाने का उन्हें भरोसा दिलाया।

https://www.pmwebsolution.in/
https://www.hindiblogs.co.in/contact-us/

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here