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संजीव शुक्ला

आज की पत्रकारिता

संजीव कुमार शुक्ला पत्रकारिता के अपने मानक होते हैं। वह सोद्देश्यपरक होती है। लोकमंगल की कामना, उसका अभीष्ट है। मानवीय...

दलबदल एक क्रांतिकारी गतिविधि

संजीव शुक्ल इधर भारतीय समाज में दलबदलुओं को कुछ ज़्यादा ही गिरी हुई निगाह से देखा...

एक व्यंग्य “नासमझ मजदूर”

संजीव कुमार शुक्ला सरकार हमें घर की याद आ रही, अब हम घर जाना चाहते हैं। अब यहाँ...

बंटवारे के बहाने गांधी पर निशाना-bantavaare ke bahaane gaandhee par nishaana

अजीब तर्क है और धूर्तता भी कि गांधी तो कहते थे कि बंटवारा हमारी लाश पर होगा, फिर जीते जी उन्होंने बंटवारे...

खालिस्तानी किसान-khalistani kisan

अरे भाई किसानों को खालिस्तानी कहने पर इतना क्या बुरा मानना !!!!  अरे यह तो  उनकी पहचान है।...

नमन उन घोटालेबाजों को..

संजीव कुमार शुक्ला जिस तरह ईश्वर होता तो है, पर दिखाई नही देता, ठीक उसी तरह...

“सत्ता है अब नगर वधू”

संजीव कुमार शुक्ला सत्ता है अब नगर वधू ,  हर  कोई  उसको छूना चाहे ,, मर्यादा  की ...

साम्प्रदायिकता और हम

संजीव कुमार शुक्ला आज जबकि पूरा देश, पूरा विश्व कोरोना महामारी से जूझ रहा है, हमको अपने देश में कोरोना...

दीवारों की अहमियत

संजीव कुमार दीवार शब्द सुनते ही पता नहीं क्यों दिल बैठने सा लगता है; अजीब-अजीब...

पुरस्कार हमारी जरूरत है, इसलिए जरूरी है-The prize is our need, so it is...

बड़ी ग़जब चीज है पुरस्कार !! यह स्वयं में उपलब्धि है। उपलब्धि इस मायने में कि कई बार...

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जितने जीत के कारक हैं, उतनी हार की भी अपनी वजहें हैं। अगर नैतिक/अनैतिक दृष्टि से न देखा...

दलबदल एक क्रांतिकारी गतिविधि-Defection is a revolutionary activity

इधर भारतीय समाज में दलबदलुओं को कुछ ज़्यादा ही गिरी हुई निगाह से देखा जाने लगा है। राजनीतिक विशेषज्ञों और समाजशास्त्रियों की...

लता जी के अंतिम शब्द जरूर सुनिएगा-

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लता मंगेशकर के अंतिम शब्दइस दुनिया में मौत से ज्यादा वास्तविक कुछ भी नहीं है।दुनिया की सबसे महंगी ब्रांडेड कार मेरे गैरेज...