वही बना पुरुषोत्तम-He became Purushottam

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अगर हम सभी बनना चाहे, बन सकते हैं राम।
पहले जीवन करना होगा, मर्यादा के नाम।।
माता-पिता गुरुजन का मन से, आदर करना होगा।
सच्चाई के पथ पर ही पग, हमको धरना होगा।
रोम रोम में दया प्रेम, करुणा को भरना होगा।
भी नहीं दुर्बल जन हित में, जीना मरना होगा।।
रहना होगा सजग सृष्टि हित, हमको आठो याम।
अगर हम सभी बनना चाहे, बन सकते हैं राम।।
संवादों में स्नेह, सोच में भर लेना पावनता,
मन से दूर भावों की सारी करना दूर मलिनता।
व्यवहारों में करो समाहित संयम नियम नमनता,
वही बना पुरुषोत्तम जो भी अपनाता सज्जनता।।
मानवता हित करना होगा हमको तप अविराम।
अगर हम सभी बनना चाहे, बन सकते हैं राम।।
ओछी राजनीति से भी तो उठना होगा ऊपर,
न्याय नीति की वर्षा करनी होगी भारत भू पर।
चाहे कोई महल हो चाहे कोई झोपड़ी छप्पर,
दृष्टि सदा सूरज समान हो, रखनी होगी सब पर।।
गांव नगर तब बन जाएंगे, अतुलित पावन धाम।
अगर हम सभी बनना चाहे, बन सकते हैं राम।।
जिधर देखिए उधर दशानन, आतंकी का दल है,
खर दूषण मारीच ताड़का से जग हुआ विकल है।
लेकिन जिस पर दिव्य पराक्रम धनुष बाण का बल है।
धर्म न्याय पुरुषार्थ अस्त्र शस्त्रों का भी संबल है।
वही राम बनकर रावण का करेगा काम तमाम।
अगर हम सभी बनना चाहे, बन सकते हैं राम।।

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