परवल खाने के स्वास्थ्य लाभ-Health Benefits of Parwal Eating

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परवल Parwal को सभी सब्जियों में सबसे अच्छा माना गया है।

आयुर्वेद में एक मट्रा परवल Parwal को ही बारहों महीने में सदा पथ्य के रूप में स्वीकार किया गया है क्योंकि परवल गुण में हल्के, पाचक, गरम, स्वादिष्ट, हृदय के लिए हितकर, वीर्य वर्धक, जठराग्नि वर्धक, स्निग्धता वर्धक, पौष्टिक, विकृत कफ को बाहर निकालने वाला और त्रिदोष नाशक है।

यह सर्दी, खांसी, बुखार, कृमि, रक्तदोष, जीर्ण ज्वर, पित्त के ज्वर, और रक्ताल्पता को दूर करता है।

परवल Parwal के दो प्रकार हैं : मीठे और कड़वे।

सब्जी के लिए सदैव मीठे, कोमल बीज वाले और सफेद गुदेवाले परवल का उपयोग किया जाता है।

जो परवल उप्पर से पीले तथा कड़क बीजवाले हो जाते हैं, उनकी सब्जी अच्छी नहीं मानी जाती।

कड़वे परवल का प्रयोग केवल औषधि के रूप में होता है।

कड़वे परवल हल्के, रूक्ष, गरम वीर्य, रुचि कर्ता, भूख वर्धक, पाचन करता, तृषा शामक, त्रिदोष नाशक, पित्तसारक, अनुलोमक, रक्त शोधक, पीड़ा शामक, घाव को मिटाने वाले, अरुचि, मंदाग्नि, यकृत विकार, उदर रोग, बवासीर, कृमि, रक्तपित्त, सूजन, खांसी, कोढ़, पित्त ज्वर, जीर्ण ज्वर और कमजोरी नाशक हैं।

औषधि प्रयोग :

१. कफ वृद्धि : डंठल के साथ मीठे परवल के 6 ग्राम पत्ते व 3 ग्राम सोंठ के काढ़े में शहद डालकर सुबह – शाम पीने से कफ सरलता से निकल जाता है।

२. ह्रदय रोग, शरीर पुष्टि : घी अथवा तेल में बनाई गई परवल Parwal की सब्जी प्रतिदिन सेवन करने से हृदय रोग में लाभ होता है, वीर्य शुद्धि होती है तथा वजन बढ़ता है।

३. आमदोष : परवल के टुकड़ों को 16 गुने पानी में उबालें । उबलते समय उनमें सोंठ, पीपरा मूल, लेंडी पीपर, काली मिर्च, जीरा व नमक डालें। चौथाई भाग शेष रह जाने पर सुबह – शाम दो बार पिएं। इससे आम दोष में लाभ होता है तथा शक्ति बढ़ती है।

४. रक्तविकार : इसके मरीज को प्रतिदिन धनिया, जीरा, काली मिर्च और हल्दी डालकर घी में बनाई गई परवल Parwal की सब्जी का सेवन करना चाहिए।

५. विश – निष्कासन : कड़वे परवल के पत्तों अथवा परवल के टुकड़ों का काढ़ा बर्बर रोगी को पिलाने से उसके शरीर में व्याप्त जहर वमन द्वारा बाहर निकल जाता है।

६. पेट के रोग : परवल Parwal के पत्ते, नीम की छाल, गुडूच व कुटकी को सम भाग में लेकर काढ़ा बनाएं। यह काढ़ा पित्त – कफ प्रधान अम्लपित्त, शूल, भ्रम, अरुचि, अग्निमांध, दाह, ज्वर तथा वमन में लाभ दायक है।

सावधानी :

गर्म तासीर वालों के लिए परवल Parwal का अधिक सेवन हानि कारक है। यदि इसके सेवन से कोई तकलीफ हुई हो तो सूखी धनिया अथवा धनिया – जीरा का चूर्ण घी – मिश्री में मिला कर चाटे अथवा हरी धनिया का रस पिएं।

विशेष :

ज्वर, चेचक (शीतला) , मलेरिया, दुष्ट व्रण, रक्तपित्त, उपंदश जैसे रोगों में मीठे परवल की उपेक्षा कड़वे परवल के पत्तों का काढ़ा अथवा उसकी जड़ का चूर्ण अधिक लाभ दायक होता है।

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