सूरदास जयंती-Surdas Jayanti

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जानिए देश भर में मनाई जाने वाली सूरदास जयंती के बारे में

देश में हर साल 17 मई को सूरदास जयंती मनाई जाती है। कवि सूरदास के जन्मोत्सव के उपलक्ष में सूरदास जयंती मनाई जाती है। सूरदास एक बहुत प्रसिद्ध कवि थे।

सूरदास जयंती क्यों मनाते हैं

सूरदास ने अपने उच्च कार्य के लिए पूरे दुनिया भर में मान्यता प्राप्त की है। सूरदास जी के गीत और कविताएं पूरे देश में काफी प्रसिद्ध है।

सूरदास भगवान कृष्ण के एक बहुत बड़े भक्त थे और देवताओं के जीवन पर लिखने के लिए पूरी तरह से हमेशा समर्पित रहते थे।

सूरदास जयंती को देश भर में बड़े ही उत्साह के साथ मनाया जाता है। जो लोग संगीत और कविताओं से जुड़े हुए हैं,वह लोग इस दिन सूरदास जी को श्रद्धांजलि अर्पित कर सूरदास जयंती मनाते हैं।

कौन थे सूरदास

सूरदास जी का जन्म 1540 ईस्वी में एक ब्राह्मण परिवार में हुआ था। सूरदास जी के पिता का रामदास गायक था।

महाकवि सूरदास जी के गुरु बल्लभाचार्य जी थे। बचपन से ही सूरदास का मन कृष्ण भक्ति में लगता था। कृष्ण भक्ति के कारण ही सूरदास जी को मदन मोहन के नाम से भी पुकारा जाता था।

सूरदास जी ने अपनी कई कविताओं में अपने आप को खुद ही मदन मोहन कहा है,क्योंकि वह अपने आप को कृष्ण भगवान का सबसे बड़ा भक्त मानते थे।सूरदास जी ने अपने गुरु से अनेक विषयों का ज्ञान प्राप्त किया।

इसी के साथ सूरदास जी को अनेक भाषाओं का भी ज्ञान था। सूरदास एक महाकवि,संत और एक बहुत बड़े संगीतकार थे। जिन्होंने अपने संगीत और अपनी कविताओं से सभी लोगों को भगवान कृष्ण की बाल लीलाओं के बारे में बताया था।

भगवान कृष्ण के सभी भक्तों में सूरदास जी का नाम सबसे पहले लिया जाता है। सूरदास जी को हिंदी साहित्य का सूरदास भी कहा जाता है। सूरदास द्वारा लिखी गई “सूरसागर” बहुत प्रमुख रचना है।

इसी के लिए बहुत सूरदास दुनिया भर में प्रसिद्ध हैं। ऐसी मान्यता है कि सूरदास जी के सूरसागर में 100000 गीत हैं जिनमें से आज बस 8000 ही बचे हैं।

सूरदास जी के सभी गीतों में कृष्ण भगवान जी की बचपन लीलाओं का वर्णन किया गया है। इसी के साथ सूरदास जी ने सुर-सारावली और साहित्य- लहरी की भी रचना की थी।

इसी के साथ सूरदास जी हिंदी के सभी कवियों में शिरोमणि माने जाते हैं। सूरदास जी का ब्रजभाषा के साहित्य में बहुत बड़ा स्थान है।

कैसे मनाई जाती है सूरदास जयंती

हमारे देश में सूरदास जयंती उत्तरी क्षेत्रों में ज्यादा मनाई जाती है। भगवान कृष्ण के भक्त कृष्ण की पूजा करते हैं और साथ ही कृष्ण भगवान के लिए व्रत भी रखते हैं।

कई संगीत की कमेटी इस दिन संगीत और कविताओं का बड़ा प्रोग्राम आयोजित करते हैं और उत्साह के साथ इस दिन को मनाते हैं।

वृंदावन, मथुरा जैसे जगहों पर विशेष कार्यक्रम कर सूरदास जयंती भी मनाई जाती है। सूरदास जयंती के दिन कई जगह मंदिरों में भगवान कृष्ण की पूजा होती है।

इसी के साथ बड़े- बड़े कार्यक्रम भी आयोजित किए जाते हैं।

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मैं अंशिका जौहरी हूं। मैंने हाल ही में पत्रकारिता में मास्टर डिग्री हासिल की है। और मैं hindiblogs पर biographies, motivational Stories, important days के बारे में लेख लिखती हूं।

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