बिपिन चंद्र पाल जी की पुण्यतिथि-Bipin Chandra Pal ji’s death anniversary

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बिपिन चंद्रपाल जी की पुण्यतिथि हर साल देश में 20 मई को मनाई जाती है। बिपिन चंद्रपाल जी एक लेखक, क्रांतिकारी, पत्रकार एवं शिक्षक थे।

बिपिन चंद्र पाल का प्रारंभिक जीवन

साल 1858 में 7 नवंबर को बिपिन चंद्रपाल जी का जन्म बांग्लादेश के हबीबगंज जिले में हुआ था। बिपिन चंद्र पाल जी के पिता रामचंद्र एक पारसी विद्वान और जमींदार थे।

बिपिन चंद्र पाल बहुत छोटी उम्र में ब्रह्म समाज में शामिल हो गए थे। बिपिन चंद्र पाल समाज के और लोगों की तरह सामाजिक बुराइयों और रूढ़िवादी परंपराओं का विरोध करने लगे।

बिपिन चंद्र पाल जी ने बहुत कम उम्र में जातियों में होने वाले भेदभाव के खिलाफ आवाज उठाई और अपने से ऊंची जाति की विधवा लड़की से विवाह किया।

इस कारण विपिन चंद्र पाल जी को अपने परिवार से भी दूर होना पड़ा। बिपिन चंद्र पाल जी अपनी बात के पक्के थे इसीलिए उन्होंने कोई भी समझौता नहीं किया और अपने परिवार से अलग हो गए।

कौन थे बिपिन चंद्र पाल

बिपिन चंद्र पाल एक महान व्यक्ति थे। भारत के स्वतंत्रता आंदोलन में चंद्रपाल जी ने बुनियाद रखने में एक प्रमुख भूमिका निभाई थी। बिपिन चंद्र पाल एक मशहूर तिकड़ी के सदस्य थे।

जिसमें (लाला लाजपत राय, श्री बालगंगाधर तिलक एवं बिपिन चंद्र पाल) शामिल थे। बिपिन चंद्र पाल एक राष्ट्रवादी नेता होने के साथ-साथ एक बहुत अच्छे वक्ता भी थे।

पूरे भारत में बिपिन चंद्र पाल को क्रांतिकारी विचारों का जनक भी माना जाता था। बिपिन चंद्र पाल ने साल 1905 में बंगाल विभाजन के विरोध में अंग्रेजी शासक के खिलाफ आंदोलन बड़ा योगदान दिया जिसके साथ बड़ी संख्या में जनता का साथ मिला ‌।

विदेशी उत्पादों से हमारे देश की अर्थव्यवस्था बिगड़ रही थी और लोगों से काम बिछड़न रहा था इस बात को लाल बाल पाल की तिकड़ी ने महसूस किया और अपने विचारों को मिलाकर इस आंदोलन को बढ़ावा दिया।

जिसके बाद ब्रिटेन में बने सामानों का बहिष्कार, मिलों में बने कपड़ों का त्याग एवं व्यवसायिक प्रतिष्ठानों में हड़ताल। जिसके बाद ब्रिटिश हुकूमत की नींद उड़ गई।

जब राष्ट्रीय आंदोलन शुरू हुआ लाल बाल पाल की भूमिका इस आंदोलन में बेहद जरूरी रही। इनकी तिकड़ी होने से इस आंदोलन को एक नई दिशा मिल गई।

जिसके बाद लोगों के बीच जागरूकता बढ़ी। बिपिन चंद्रपाल जी ने सबसे बड़ी भूमिका लोगों को जागरूक करने में निभाई।

बिपिन चंद्र पाल जी का माना था कि विदेशी लोगों और उनकी हुकूमत पर एक करारा प्रहार देना होगा। इसी कारण बिपिन चंद्र पाल जी को इस आंदोलन का ‘क्रांतिकारी विचारों’ का पिता माना जाता है।

बिपिन चंद्र पाल जी का राजनीतिक सफर

साल 1886 में बिपिन चंद्र पाल जी कांग्रेस पार्टी में शामिल हुए। साल 1887 में अंग्रेजी सरकार द्वारा शुरू किए गए ‘शस्त्र अधिनियम’ तुरंत हटाने की मांग की क्योंकि यह एक अधिनियम भेदभाव था।

इसके बाद बिपिन चंद्र पाल जी ने क्रांतिकारी गतिविधियों में भाग लिया।

विपिन चंद्र पाल जी का निधन

साल 1932 में 20 मई को बिपिन चंद्र पाल जी का कोलकाता में निधन हो गया। साल 1922 में बिपिन चंद्र पाल जी राजनीति से अलग हो गए थे और अपने मृत्यु के समय तक अलग ही रहे।

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मैं अंशिका जौहरी हूं। मैंने हाल ही में पत्रकारिता में मास्टर डिग्री हासिल की है। और मैं hindiblogs पर biographies, motivational Stories, important days के बारे में लेख लिखती हूं।

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