हुआ सवेरा-Hua Sawera

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हुए सवेरा जागी चिड़िया, भगा अंधेरा जागी चिड़िया

सूरज ने भी ली अंगड़ाई, धूप भारी चादर फैलाई।

हरी घास पर बिखेर मोती, धरती भी है सोना बोती

मुर्गी जी कुकडू – कूं बोले, पंख कबूतर ने झट खोल

कुहू – कुहू जब कोयल बोली, वन उपवन में मिश्री घोली

फूलों ने जब देखा हंसकर, महक उठा खुशबू से अम्बर।

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